@संपादकीय: समय बदल रहा है। समाज बदल रहा है। रिश्तों को व्यक्त करने का तरीका बदल रहा है। कभी किसी की उपलब्धि पर लोग उसके घर पहुँचते थे। गले मिलते थे, मिठाई खिलाते थे और आँखों में देखकर कहते थे—“बहुत अच्छा किया, हमें तुम पर गर्व है।”

आज वही भावनाएँ मोबाइल की स्क्रीन पर दिखाई देती हैं।

एक दिन एक कार्यक्रम में मेरा भव्य स्वागत हुआ। फूलों की मालाओं और फूलों के बड़े-बड़े गुलदस्तों से सम्मान मिला। उस क्षण मन में एक अलग ही भाव था। सामने लोगों का स्नेह, सम्मान और अपनापन देखकर लगा कि शायद मेरी मेहनत और उपलब्धियों को लोगों ने दिल से स्वीकार किया है।

"सोशल मीडिया और बदलता हुआ समाज (फूलों की माला, सोशल मीडिया की वाहवाही और वास्तविक जीवन की खामोशी) लेखक: डॉ. संजय कुमार यादव, सहायक प्रोफेसर (डिजिटल विपणन एवं उपभोक्ता मनोविज्ञान), सर पद्मपत सिंघानिया विश्वविद्यालय, उदयपुर"

उस तस्वीर ने सोशल मीडिया पर भी खूब प्रतिक्रियाएँ बटोरीं। किसी ने “Congratulations” लिखा, किसी ने “Very Nice”, किसी ने ताली बजाने वाला इमोजी भेजा तो किसी ने दिल। स्क्रीन पर देखकर लगा कि कितने लोग मेरी खुशी में शामिल हैं।

लेकिन कुछ समय बाद जब उन्हीं में से कुछ लोगों से आमने-सामने मुलाकात हुई, तो एक अजीब-सी खामोशी महसूस हुई। वही लोग, जिन्होंने सोशल मीडिया पर मेरी उपलब्धि पर उत्साह दिखाया था, सामने मिलने पर लगभग सामान्य थे। न कोई विशेष खुशी, न कोई आत्मीयता, न उस उपलब्धि को लेकर कोई विशेष प्रतिक्रिया।

तब पहली बार महसूस हुआ कि कैमरे के सामने होने वाला सम्मान और दिल में होने वाला सम्मान शायद दो अलग-अलग चीजें हैं।

गले में पड़ी फूलों की मालाएँ उस दिन बहुत सुंदर थीं, लेकिन उन्होंने मेरे मन में एक सवाल भी छोड़ दिया—क्या फूलों के साथ भावनाएँ भी सच्ची थीं?

फूल तो कुछ घंटों या दिनों में मुरझा जाते हैं। तस्वीरें भी कुछ समय बाद पुरानी हो जाती हैं। सोशल मीडिया की पोस्ट भी धीरे-धीरे नीचे चली जाती है। लेकिन किसी व्यक्ति की सच्ची खुशी, उसका आत्मीय व्यवहार और मुश्किल समय में उसका साथ—ये ऐसी चीजें हैं जो समय के साथ और मूल्यवान होती जाती हैं।

शायद आज हम इसी अंतर को भूलते जा रहे हैं। हमने सम्मान को तस्वीरों में, शुभकामनाओं को कमेंट में और अपनापन इमोजी में बदल दिया है।

जबकि रिश्तों की असली खूबसूरती तब होती है, जब कोई कैमरा न हो, कोई पोस्ट न हो, कोई “Like” न हो—फिर भी कोई आपके सामने खड़ा होकर कहे: “आपकी खुशी मेरी खुशी है।”