@रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया एक बार फिर अव्यवस्था का शिकार होती नजर आ रही है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी संशोधित समय-सारिणी के अनुसार द्वितीय चरण के छात्र पंजीयन (ऑनलाइन आवेदन) की तिथि 1 जुलाई से 11 जुलाई निर्धारित की गई है,
लेकिन 2 जुलाई तक भी न तो RTE पोर्टल पर आवेदन शुरू हो सके हैं और न ही शिक्षा विभाग ने इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना या स्पष्टीकरण जारी किया है।
हजारों अभिभावक विभाग की घोषित समय-सारिणी पर भरोसा कर आवेदन का इंतजार कर रहे हैं। निर्धारित तिथि बीतने के बाद भी पोर्टल बंद रहने से अभिभावकों में भारी नाराजगी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि विभाग ने देरी का कारण बताना भी जरूरी नहीं समझा।
सवाल यह है कि जब विभाग अपनी ही जारी की गई समय-सारिणी का पालन नहीं कर सकता, तो ऐसी समय-सारिणी जारी करने का औचित्य क्या है? यदि किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से आवेदन शुरू नहीं हो पाए हैं, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं दी जा रही? बच्चों के भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले में विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
RTE जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को समय पर शिक्षा का अधिकार दिलाना है, लेकिन विभाग की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया इस उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लगा रहा है।


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