रायपुर. केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के तहत National Fisheries Digital Platform (NFDP) लाभ पहुँचने के लिए रजिस्ट्रेशन अब छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के सभी मछली पालकों, मछुआरों, मत्स्य विक्रेताओं, सहकारी समितियों और माइक्रो-एंटरप्राइजेज के पंजीकरण अनिवार्य हो गया है। बिना NFDP रजिस्ट्रेशन के संबंधित क्षेत्र में केंद्र से कोई भी वित्तीय सहायता, सब्सिडी, इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट, एक्वाकल्चर इंश्योरेंस, परफॉर्मेंस-बेस्ड इंसेंटिव्स या अन्य लाभ नहीं मिलेंगे।

छत्तीसगढ़ में ताजा स्थिति 

कुल NFDP रजिस्ट्रेशन पूरे भारत में 29 लाख 25 हजार+ हो चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में अब तक 57,764 (करीब 1.54% शेयर) सफल रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी लाखों मत्स्य पालक बिना रजिस्ट्रेशन के हैं।

रजिस्ट्रेशन से डिजिटल आईडी मिलती है, जिससे लोन, बीमा और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं आसान हो जाती हैं।

यह प्लेटफॉर्म 11 सितंबर 2024 को लॉन्च हुआ था और अब यह मत्स्य क्षेत्र को पूरी तरह डिजिटल बनाने का मुख्य माध्यम बन चुका है। छत्तीसगढ़ में राज्य मत्स्य विभाग और CSC केंद्रों के माध्यम से अभियान चल रहा है।

छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए फायदे:

आसान लोन और क्रेडिट → 12 बैंक जुड़े हैं, लोन लीड्स जनरेट हो रही हैं।

एक्वाकल्चर इंश्योरेंस → तालाब/मछली फार्म की सुरक्षा।

परफॉर्मेंस इंसेंटिव्स और ट्रेसेबिलिटी → बेहतर मार्केटिंग और एक्सपोर्ट।

ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन → ₹100 शुल्क पर डिजिटल प्रमाणपत्र।

छत्तीसगढ़ में टिलापिया क्लस्टर जैसी योजनाएं भी NFDP से जुड़ी हैं।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें? (रायपुर और छत्तीसगढ़ में आसान तरीका)

आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: https://nfdp.dof.gov.in/

नए यूजर Sign Up करें (आधार कार्ड, बैंक पासबुक, आधार लिंक्ड मोबाइल जरूरी)।

CSC केंद्र (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाकर फ्री/सहायता से रजिस्ट्रेशन करवाएं – ग्रामीण इलाकों में सबसे आसान।

मोबाइल ऐप (Android/iOS) से भी कर सकते हैं।

OTP आधार लिंक्ड मोबाइल पर आएगा।

अगर आप रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा या किसी भी जिले में मछली पालन करते हैं, तो जल्द से जल्द रजिस्टर कर लें! भविष्य में सभी सरकारी योजनाएं (जैसे KCC फिशरीज, सब्सिडी आदि) सिर्फ रजिस्टर्ड लोगों को ही मिलेंगी।

अधिक जानकारी के लिए:

हेल्पलाइन: 14599 या 1800-425-1660

नजदीकी CSC या जिला मत्स्य अधिकारी से संपर्क करें।